अडाणी का कोल प्रोजेक्ट आगे बढ़ा तो क्रिकेट पर असर: ऑस्ट्रेलियाई सिटिजंस का लेटर

 
मेलबर्न/अहमदाबाद. ऑस्ट्रेलिया के इंटलैक्चुअल लोगों ने अडाणी ग्रुप से क्वींसलैंड में कोल माइन प्रोजेक्ट वापस लेने की अपील की है। इनमें पूर्व मशहूर क्रिकेटर इयान और ग्रेग चैपल भी हैं। इन्होंने कहा है कि प्रोजेक्ट आगे बढ़ा तो दोनों देशों के बीच संबंधों पर बुरा असर हो सकता है। यहां तक कि क्रिकेट और दूसरे खेल भी प्रभावित हो सकते हैं। करीब एक लाख करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को वहां की सरकार और कोर्ट की मंजूरी मिल चुकी है। यह दुनिया के सबसे बड़े कोल प्रोजेक्ट में एक है। इस पर इसी साल काम शुरू होना है। यह प्रोजेक्ट एन्वार्यनमेंट के लिए मशहूर 'ग्रेट बैरियर रीफ' के पास है। खत में और क्या...
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- न्यूज एजेंसी के मुताबिक ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी के नाम ओपन लेटर लिखा है। इसमें प्रोजेक्ट के चलते एन्वार्यनमेंट, खनन करने वालों और क्लाइमेट पर पड़ने वाले साइड इफेक्ट का जिक्र किया गया है।
- इयान चैपल ने लिखा है, "भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों में क्रिकेट का भी महत्व है। यह प्रोजेक्ट हमारे संबंध बिगाड़ सकता है। उम्मीद है ऐसा नहीं होगा।"
- चार लोगों का डेलीगेशन यह लेटर लेकर भारत आया है। उसने गुरुवार को इसे अडाणी ग्रुप के हेडक्वार्टर को सौंपा।
भारत की इमेज को होगा नुकसान
- लेटर में लिखा है कि खनन प्रोजेक्ट से ऑस्ट्रेलिया में भारत की इमेज को नुकसान पहुंचता है तो यह 'शर्मिंदगी' की बात होगी। लेटर पर दस्तखत करने वालों में चैपल ब्रदर्सके अलावा राइटर रिचर्ड फ्लेनेगन और टिम विंटन, टेलीकॉम कंपनी टेल्स्ट्रा के चेयरमैन जॉन मुलेन और इन्वेस्टमेंट बैंकर मार्क बरोज समेत 90 जाने-माने ऑस्ट्रेलियाई हैं।
ग्लोबल वार्मिंग की सबसे बड़ी वजह कोयला
- लेटर में यह भी कहा गया है, 'ग्लोबल वार्मिंग की सबसे बड़ी वजह कोयला है। इससे ऑस्ट्रेलिया और भारत समेत पूरी दुनिया में लोगों को नुकसान हो रहा है। हेल्थ मैगजीन लांसेट ने प्रोजेक्ट को सेहत के लिए नुकसानदायक बताया है। प्रोजेक्ट से ग्राउंड वाटर प्रभावित होगा। किसान अपनी रोजी-रोटी के लिए ग्राउंड वाटर पर ही डिपेंड हैं।
हजारों जीव, 600 तरह के कोरल हैं ग्रेट बैरियर रीफ में
- ग्रेट बैरियर रीफ नॉर्थ-ईस्ट ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड प्रोविंस में है। 2,300 km लंबे इस ईको-सिस्टम में हजारों रीफ (चट्‌टानें) और सैकड़ों आईलैंड है। यहां 600 तरह के सख्त और मुलायम कोरल (मूंगा) पाए जाते हैं। यहां रंगीन मछलियों, सीप, स्टारफिश, कछुओं, डॉल्फिन और शार्क की हजारों किस्में भी पाई जाती हैं।
60 साल तक चलेगी माइनिंग, इसलिए विरोध
- कोल माइनिंग के चलते रीफ के पास करीब 11 लाख घन मीटर कटाई होगी। 60 साल तक वहां से हर वर्ष 6 करोड़ टन कोयले का एक्सपोर्ट होगा। ढुलाई के लिए जहाज उस इलाके में आते-जाते रहेंगे। इससे रीफ और समुद्री जीवों को नुकसान होगा। 
- इस विवादित प्रोजेक्ट के खिलाफ पहले कई बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है, लेकिन आखिरकार इसे मंजूरी मिल गई। एसबीआई ने इसके लिए लोन देने पर रजामंदी जताई थी तो उसका भी जबरदस्त विरोध हुआ था।

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