मुझे बेइज्जत किया, 14 करोड़ का मुआवजा दिया जाए: जस्टिस कर्णन का CJI को लेटर

 
नई दिल्ली.कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन ने अब चीफ जस्टिस जेएस खेहर और कुछ दूसरे जजों को लेटर लिखकर 14 करोड़ रुपए मुआवजा मांगा है। लेटर में लिखा है कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया और सरेआम उनकी बेइज्जती की गई, जिसके बदले में उन्हें यह रकम दी जाए। बता दें कि जस्टिस कर्णन ने पीएम को लेटर लिखकर कुछ रिटायर्ड और मौजूदा जजों पर करप्शन के आरोप लगाए थे। इसकी वजह से उन पर अवमानना का केस चल रहा है। कई बार नोटिस जारी होने के बाद भी वो कोर्ट में हाजिर नहीं हुए हैं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ बेलेबल वारंट जारी किया था। वह पहले ऐसे जस्टिस हैं, जिनके खिलाफ वारंट जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था बेलेबल वारंट...
- चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुआई वाली सात जजों की बेंच ने 10 मार्च को जस्टिस कर्णन के खिलाफ बेलेबल वारंट जारी किया था। इसमें उन्हें 31 मार्च को कोर्ट में हाजिर करने का ऑर्डर दिया गया था।
- वेस्ट बंगाल के डीजीपी को इस वारंट की तामील करने को कहा गया था।
क्या है मामला?
- जस्टिस कर्णन ने 23 जनवरी को पीएम को लेटर लिखकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों और मद्रास हाईकोर्ट के मौजूदा जजों पर करप्शन के आरोप लगाए थे।
- इसमें कहा गया था कि नोटबंदी से करप्शन कम हुआ है, लेकिन ज्यूडिशियरी में मनमर्जी और बेखौफ करप्शन हो रहा है।
- उन्होंने लेटर में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के मौजूदा और रिटायर्ड 20 जजों के नाम भी लिखे थे। मामले की किसी एजेंसी से जांच की मांग भी की थी।
- इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को जस्टिस कर्णन को नोटिस जारी पूछा था कि क्यों न इसे कोर्ट की अवमानना माना जाए।
- कोर्ट ने उन्हें मामले की सुनवाई होने तक सभी ज्यूडिशियल और एडमिनिस्ट्रिव फाइलें कलकत्ता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को लौटाने को कहा था।
- सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को 13 फरवरी को कोर्ट में पेश हाेने को कहा था, लेकिन वो हाजिर नहीं हुए।
- बता दें कि यह पहला केस था जब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मौजूदा जज को अवमानना का नोटिस भेजा था।
दलित होने की वजह से मुझ पर हो रही कार्रवाई: कर्णन
- कर्णन सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को लेटर लिखकर यह आरोप भी लगा चुके हैं कि दलित होने की वजह से उन पर यह एक्शन लिया जा रहा है।
उन्होंने अपने लेटर में लिखा था, "यह ऑर्डर (सुप्रीम कोर्ट का नोटिस) साफ तौर पर बताता है कि ऊंची जाति के जज कानून अपने हाथ में ले रहे हैं और अपनी ज्यूडिशियल पावर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।"
- "यह एक एससी/एसटी (दलित) जज से छुटकारा पाने के लिए किया जा रहा है।"
पहले भी विवादों में रहे हैं जस्टिस कर्णन
- जस्टिस कर्णन 2011 में मद्रास हाईकोर्ट में जज थे। 
- उस वक्त उन्होंने एक साथी जज के खिलाफ जातिसूचक शब्द कहने की शिकायत दर्ज कराई थी।
- 2014 में मद्रास हाईकोर्ट में जजों के अप्वाइंटमेंट को लेकर वो तब के चीफ जस्टिस के चेंबर में घुस गए थे और बदसलूकी की थी।
- इसके अलावा, जस्टिस कर्णन ने उन्हें मद्रास हाईकोर्ट से कलकत्ता हाईकोर्ट ट्रांसफर करने पर इस मामले की खुद सुनवाई शुरू कर दी थी।
- बाद में इसके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन लगाई थी। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

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